पटना / नई दिल्ली | Bihar Politics News
Information: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। जन सुराज पार्टी के प्रमुख और चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि चुनाव की घोषणा के बाद बिहार सरकार ने आचार संहिता का उल्लंघन किया, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रशांत किशोर की पार्टी ने नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराने की मांग की है। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में होने की संभावना है।
क्या है पूरा मामला?
जन सुराज पार्टी की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि—
- चुनाव की आधिकारिक घोषणा के बाद
- मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत
- महिलाओं के बैंक खातों में 10,000 रुपये सीधे ट्रांसफर किए गए
याचिका के अनुसार, यह कदम आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) का सीधा उल्लंघन है और इससे मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
सुप्रीम कोर्ट में क्या मांग की गई है?
प्रशांत किशोर की पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि—
- चुनाव आयोग को मामले की गंभीर जांच का निर्देश दिया जाए
- संविधान के अनुच्छेद 324 और
- लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 के तहत
महिला मतदाताओं को सीधे धन हस्तांतरण के खिलाफ कार्रवाई हो - यदि उल्लंघन साबित होता है तो
बिहार विधानसभा चुनाव रद्द कर नए सिरे से चुनाव कराए जाएं
किस बेंच के सामने होगी सुनवाई?
सूत्रों के मुताबिक, इस याचिका पर सुनवाई—
- प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत
- और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची
की पीठ के समक्ष हो सकती है।
इस सुनवाई पर बिहार की राजनीति की दिशा तय हो सकती है।
पिछले विधानसभा चुनाव का रिजल्ट
गौरतलब है कि पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में—
- बीजेपी नीत एनडीए (NDA) ने
243 में से 202 सीटें जीतकर
भारी बहुमत से सरकार बनाई थी - वहीं INDIA ब्लॉक को
कुल 35 सीटें मिली थीं
कांग्रेस को सिर्फ 6 सीटें हासिल हुई थीं - जन सुराज पार्टी का खाता नहीं खुल सका था
पार्टी के अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत भी जब्त हो गई थी
राजनीतिक हलकों में तेज हुई चर्चा
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद यह सवाल उठने लगे हैं—
क्या चुनाव के बाद शुरू की गई योजनाएं आचार संहिता के दायरे में आती हैं?
क्या सीधे धन हस्तांतरण को वोटरों को प्रभावित करने का जरिया माना जाएगा?
क्या सच में बिहार में दोबारा विधानसभा चुनाव संभव है?
इन सवालों के जवाब अब अदालत की सुनवाई पर निर्भर करेंगे।
प्रशांत किशोर का यह कदम क्यों अहम?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार—
- यह याचिका सिर्फ चुनाव परिणाम को चुनौती नहीं
- बल्कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल है
- अगर कोर्ट ने याचिका पर गंभीर रुख अपनाया, तो
इसका असर भविष्य के चुनावों पर भी पड़ सकता है
अब आगे क्या?
- सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर सभी की नजर
- चुनाव आयोग की भूमिका भी जांच के घेरे में
- बिहार की राजनीति में नया मोड़ तय माना जा रहा है